मुझे फरक नहीं पड़ता,,,,अब क़समें खाओ या जहर..!!
शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था
तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी
बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!
समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से, अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी
हमने तो एक ही शख्स पर चाहत खत्म कर दी अब मोहब्बत किसे कहते हैं हमे मालूम नहीं
मुझे फरक नहीं पड़ता,,,,अब क़समें खाओ या जहर..!!
शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था
तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी
बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!
समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से, अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी
हमने तो एक ही शख्स पर चाहत खत्म कर दी अब मोहब्बत किसे कहते हैं हमे मालूम नहीं