कभी मौका मिले तो सोचना ज़रूर कि एक लापरवाह शख़्स तेरी इतनी परवाह क्यूं करता है
ना चाँद अपना था और ना तू अपना था ...!! काश दिल भी मान लेता की सब सपना था
जब तेरी याद आती है ना आँखे तोह मान जाती है पर यह कम्बख्त दिल रो पड़ता है
भुला दूंगा तुझे ज़रा सब्र तो कर, तेरी तरह मतलबी बनने में थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही।
वो भी जिन्दा है, मैं भी जिन्दा हूँ… क़त्ल सिर्फ इश्क़ का हुआ है
साथ छोडने वालो को तो बस.. ऐक बहाना चाहिए। वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाझे तक साथ नही छोडते।
कभी मौका मिले तो सोचना ज़रूर कि एक लापरवाह शख़्स तेरी इतनी परवाह क्यूं करता है
ना चाँद अपना था और ना तू अपना था ...!! काश दिल भी मान लेता की सब सपना था
जब तेरी याद आती है ना आँखे तोह मान जाती है पर यह कम्बख्त दिल रो पड़ता है
भुला दूंगा तुझे ज़रा सब्र तो कर, तेरी तरह मतलबी बनने में थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही।
वो भी जिन्दा है, मैं भी जिन्दा हूँ… क़त्ल सिर्फ इश्क़ का हुआ है
साथ छोडने वालो को तो बस.. ऐक बहाना चाहिए। वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाझे तक साथ नही छोडते।