बेवजह इंतज़ार

बेवजह इंतज़ार

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उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी

ऐ दिल थोड़ी सी हिम्मत कर ना यार, दोनों मिल कर उसे भूल जाते है

हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है

हमने तो एक ही शख्स पर चाहत खत्म कर दी अब मोहब्बत किसे कहते हैं हमे मालूम नहीं

चाह कर भी उनका हाल नहीं पूछ सकते डर है कहीं कह ना दे कि ये हक्क तुम्हे किसने दिया

नहीं मिलेगा तुझे कोई हम सा, जा इजाजत है ज़माना आजमा ले !!

उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी

ऐ दिल थोड़ी सी हिम्मत कर ना यार, दोनों मिल कर उसे भूल जाते है

हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है

हमने तो एक ही शख्स पर चाहत खत्म कर दी अब मोहब्बत किसे कहते हैं हमे मालूम नहीं

चाह कर भी उनका हाल नहीं पूछ सकते डर है कहीं कह ना दे कि ये हक्क तुम्हे किसने दिया

नहीं मिलेगा तुझे कोई हम सा, जा इजाजत है ज़माना आजमा ले !!