पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
हमे नहीं आता दर्द का दिखावा करना बस अकेले रोते हैं और सो जाते हैं
कितनी झूठी है ना मोहब्बत की कसमे, देखो ना ! तुम भी जिन्दा हो, मै भी जिन्दा हुँ
बेवजह इंतज़ार
अगर किसी दिन तुम्हें रोना आए तो कॉल जरूर कर लेना, हंसाने की गारंटी तो नहीं लेता पर तेरे साथ जरूर रहूंगा
क्या खूब मजबूरियां थी मेरी भी अपनी ख़ुशी को छोड़ दिया ” उसे ” खुश देखने के लिए
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
हमे नहीं आता दर्द का दिखावा करना बस अकेले रोते हैं और सो जाते हैं
कितनी झूठी है ना मोहब्बत की कसमे, देखो ना ! तुम भी जिन्दा हो, मै भी जिन्दा हुँ
बेवजह इंतज़ार
अगर किसी दिन तुम्हें रोना आए तो कॉल जरूर कर लेना, हंसाने की गारंटी तो नहीं लेता पर तेरे साथ जरूर रहूंगा
क्या खूब मजबूरियां थी मेरी भी अपनी ख़ुशी को छोड़ दिया ” उसे ” खुश देखने के लिए