लोग कहते हैं समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं, मैं अर्सों से खामोश हूँ वो बरसों से बेखबर है
उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी
आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.
बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!
शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था
जो बीत गया सो बीत गया…आने वाला सुनहरा कल है वो…..मैं कैसे भुला दूँ दिल से उसे… मेरी हर मुश्किल का हल है वो
लोग कहते हैं समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं, मैं अर्सों से खामोश हूँ वो बरसों से बेखबर है
उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी
आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.
बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!
शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था
जो बीत गया सो बीत गया…आने वाला सुनहरा कल है वो…..मैं कैसे भुला दूँ दिल से उसे… मेरी हर मुश्किल का हल है वो