मत करो उसके मैसेज का इन्तजार जो ऑनलाइन तो है पर किसी और के लिया..
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
चाह कर भी उनका हाल नहीं पूछ सकते डर है कहीं कह ना दे कि ये हक्क तुम्हे किसने दिया
बेवजह इंतज़ार
कभी मौका मिले तो सोचना ज़रूर कि एक लापरवाह शख़्स तेरी इतनी परवाह क्यूं करता है
बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!
मत करो उसके मैसेज का इन्तजार जो ऑनलाइन तो है पर किसी और के लिया..
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
चाह कर भी उनका हाल नहीं पूछ सकते डर है कहीं कह ना दे कि ये हक्क तुम्हे किसने दिया
बेवजह इंतज़ार
कभी मौका मिले तो सोचना ज़रूर कि एक लापरवाह शख़्स तेरी इतनी परवाह क्यूं करता है
बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!