याद करोगे एक दिन मुझे ये सोच कर की क्यों नहीं कदर की मैंने उसके प्यार की
अब अगर तुम जाने ही लगे हो तो पलट कर मत देखना, *क्योकि मौत की सजा लिखने के बाद कलम तोड़ दी जाती है*
ना चाँद अपना था और ना तू अपना था ...!! काश दिल भी मान लेता की सब सपना था
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
कुछ सोचना चाहिए था उसे, हर सितम से पहले, मै सिर्फ दीवाना नहीं था, इन्सान भी था...
शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था
याद करोगे एक दिन मुझे ये सोच कर की क्यों नहीं कदर की मैंने उसके प्यार की
अब अगर तुम जाने ही लगे हो तो पलट कर मत देखना, *क्योकि मौत की सजा लिखने के बाद कलम तोड़ दी जाती है*
ना चाँद अपना था और ना तू अपना था ...!! काश दिल भी मान लेता की सब सपना था
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
कुछ सोचना चाहिए था उसे, हर सितम से पहले, मै सिर्फ दीवाना नहीं था, इन्सान भी था...
शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था