हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है

हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है

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मुझे फरक नहीं पड़ता,,,,अब क़समें खाओ या जहर..!!

बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!

कुछ सोचना चाहिए था उसे, हर सितम से पहले, मै सिर्फ दीवाना नहीं था, इन्सान भी था...

साथ छोडने वालो को तो बस.. ऐक बहाना चाहिए। वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाझे तक साथ नही छोडते।

भुला दूंगा तुझे ज़रा सब्र तो कर, तेरी तरह मतलबी बनने में थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही।

उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी

मुझे फरक नहीं पड़ता,,,,अब क़समें खाओ या जहर..!!

बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!

कुछ सोचना चाहिए था उसे, हर सितम से पहले, मै सिर्फ दीवाना नहीं था, इन्सान भी था...

साथ छोडने वालो को तो बस.. ऐक बहाना चाहिए। वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाझे तक साथ नही छोडते।

भुला दूंगा तुझे ज़रा सब्र तो कर, तेरी तरह मतलबी बनने में थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही।

उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी