लोग कहते हैं समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं, मैं अर्सों से खामोश हूँ वो बरसों से बेखबर है

लोग कहते हैं समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं, मैं अर्सों से खामोश हूँ वो बरसों से बेखबर है

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याद करोगे एक दिन मुझे ये सोच कर की क्यों नहीं कदर की मैंने उसके प्यार की

समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से, अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी

वो जो कल रात चैन से सोया हैं, उसको खबर भी नहीं कोई उसके लिए कितने रोया हैं..

पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना

साथ छोडने वालो को तो बस.. ऐक बहाना चाहिए। वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाझे तक साथ नही छोडते।

नहीं मिलेगा तुझे कोई हम सा, जा इजाजत है ज़माना आजमा ले !!

याद करोगे एक दिन मुझे ये सोच कर की क्यों नहीं कदर की मैंने उसके प्यार की

समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से, अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी

वो जो कल रात चैन से सोया हैं, उसको खबर भी नहीं कोई उसके लिए कितने रोया हैं..

पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना

साथ छोडने वालो को तो बस.. ऐक बहाना चाहिए। वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाझे तक साथ नही छोडते।

नहीं मिलेगा तुझे कोई हम सा, जा इजाजत है ज़माना आजमा ले !!