लोग कहते हैं समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं, मैं अर्सों से खामोश हूँ वो बरसों से बेखबर है

लोग कहते हैं समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं, मैं अर्सों से खामोश हूँ वो बरसों से बेखबर है

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हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है

जिस दिल में तेरा नाम बसा था हमने वो दिल तोड़ दिया ना होने दिया बदनाम तुझे तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया

वो भी जिन्दा है, मैं भी जिन्दा हूँ… क़त्ल सिर्फ इश्क़ का हुआ है

ज़िंदगी में मोहबत का पौधा लगाने से पहले ज़मीन परख लेना, हर एक मिटटी की फितरत में वफ़ा नहीं होती दोस्तो !!

उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी

जब तेरी याद आती है ना आँखे तोह मान जाती है पर यह कम्बख्त दिल रो पड़ता है

हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है

जिस दिल में तेरा नाम बसा था हमने वो दिल तोड़ दिया ना होने दिया बदनाम तुझे तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया

वो भी जिन्दा है, मैं भी जिन्दा हूँ… क़त्ल सिर्फ इश्क़ का हुआ है

ज़िंदगी में मोहबत का पौधा लगाने से पहले ज़मीन परख लेना, हर एक मिटटी की फितरत में वफ़ा नहीं होती दोस्तो !!

उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी

जब तेरी याद आती है ना आँखे तोह मान जाती है पर यह कम्बख्त दिल रो पड़ता है