लोग कहते हैं समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं, मैं अर्सों से खामोश हूँ वो बरसों से बेखबर है

लोग कहते हैं समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं, मैं अर्सों से खामोश हूँ वो बरसों से बेखबर है

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हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है

आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.

पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना

वो किसी की खातिर मुझे भूल भी गया तो कोई बात नहीं, हम भी तो भूल गये थे सारा ज़माना उस की खातिर

कुछ सोचना चाहिए था उसे, हर सितम से पहले, मै सिर्फ दीवाना नहीं था, इन्सान भी था...

एक खूबसूरत सा रिश्ता यूँ खतम हो गया..हम दोस्ती निभाते रहे…..और उसे इश्क हो गया

हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है

आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.

पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना

वो किसी की खातिर मुझे भूल भी गया तो कोई बात नहीं, हम भी तो भूल गये थे सारा ज़माना उस की खातिर

कुछ सोचना चाहिए था उसे, हर सितम से पहले, मै सिर्फ दीवाना नहीं था, इन्सान भी था...

एक खूबसूरत सा रिश्ता यूँ खतम हो गया..हम दोस्ती निभाते रहे…..और उसे इश्क हो गया