गलतियाँ ढूँढना गलत नही है...!! बस शुरुआत खुद से होनी चाहिए...!!!
अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया
मन होना चाहिए किसी को याद करने का वक्त तो अपने आप ही मिल जाता है
मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।
यदि आप में आत्मविश्वास नहीं है तो आप हमेशा न जीतने का बहाना खोज लेंगे
गलतियाँ ढूँढना गलत नही है...!! बस शुरुआत खुद से होनी चाहिए...!!!
अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया
मन होना चाहिए किसी को याद करने का वक्त तो अपने आप ही मिल जाता है
मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।
यदि आप में आत्मविश्वास नहीं है तो आप हमेशा न जीतने का बहाना खोज लेंगे