परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो हिसाब सबका होगा कोई कितना भी बड़ा नवाब हो
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे
जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते
दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी में हाथ नहीं उठता बस नज़रों से गिरा देता हूँ
माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं
परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो हिसाब सबका होगा कोई कितना भी बड़ा नवाब हो
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे
जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते
दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी में हाथ नहीं उठता बस नज़रों से गिरा देता हूँ
माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं