मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु
बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं.. अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती
जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है
दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु
बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं.. अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती
जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है
दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए