ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
हमारे जिँदगी की कहानी कूछ ऐसी है जिसमे Hero भी हम और Villain भी हम
जैसे तुम सोचते हो वैसे हम है नहीं और जैसे हम है वैसा तुम सोच भी नहीं सकते
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
हमारे जिँदगी की कहानी कूछ ऐसी है जिसमे Hero भी हम और Villain भी हम
जैसे तुम सोचते हो वैसे हम है नहीं और जैसे हम है वैसा तुम सोच भी नहीं सकते
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं