सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है
शरीफ इंसान शराफत की वजह से चुप रह गया | बदमाश ने समझा की उसे जवाब देना ही नहीं आता !
अच्छी किताबे,और अच्छे लोग..! तुरंत समझ में नहीं आते, उन्हें पढ़ना पड़ता है..
मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी
जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते
सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है
शरीफ इंसान शराफत की वजह से चुप रह गया | बदमाश ने समझा की उसे जवाब देना ही नहीं आता !
अच्छी किताबे,और अच्छे लोग..! तुरंत समझ में नहीं आते, उन्हें पढ़ना पड़ता है..
मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी
जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते