ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
बोलना तो सब जानते हैं पर कब और क्या बोलना है यह बहुत ही कम लोग जानते हैं
जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते
पलटकर जवाब देना गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदे भूल जाते है।
तुम्हारी अकड़ में कुछ इस तरह से तोडूंगा सच कहता हूँ कहीं का नही छोडूंगा
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
बोलना तो सब जानते हैं पर कब और क्या बोलना है यह बहुत ही कम लोग जानते हैं
जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते
पलटकर जवाब देना गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदे भूल जाते है।
तुम्हारी अकड़ में कुछ इस तरह से तोडूंगा सच कहता हूँ कहीं का नही छोडूंगा
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है