बेटा झूले पे झूल लेकिन अपनी औकात मत भूल
जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए
ऐटिटूड तो बच्चे दिखाते है हम तो लोगो को उनकी औकात दिखाते है
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
बेटा झूले पे झूल लेकिन अपनी औकात मत भूल
जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए
ऐटिटूड तो बच्चे दिखाते है हम तो लोगो को उनकी औकात दिखाते है
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..