जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है
गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है
हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें
दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी में हाथ नहीं उठता बस नज़रों से गिरा देता हूँ
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है
गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है
हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें
दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी में हाथ नहीं उठता बस नज़रों से गिरा देता हूँ
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..