हम अपनी इस अदा पर थोड़ा गुरूर करते हैं, किसी से प्यार हो या नफरत भरपूर करते हैं

हम अपनी इस अदा पर थोड़ा गुरूर करते हैं, किसी से प्यार हो या नफरत भरपूर करते हैं

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तू मोहब्बत थी इसलिए तुझे भाव दिया, वरना इग्नोर करने में मैंने पीएचडी की है

ज़ारा दिल का दर्द कम होने दो फ़िर लोगों की उनकी औक़ात याद दिलाएंगे

बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं

मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है

शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है

तू मोहब्बत थी इसलिए तुझे भाव दिया, वरना इग्नोर करने में मैंने पीएचडी की है

ज़ारा दिल का दर्द कम होने दो फ़िर लोगों की उनकी औक़ात याद दिलाएंगे

बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं

मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है

शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है