बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए

बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए

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इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं

झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है

नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता

खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी

ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं

सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं

इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं

झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है

नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता

खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी

ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं

सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं