हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें

हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें

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खौफ तो आवारा कुत्ते भी मचाते है पर दहशत हमेशा शेर की ही रहती है

जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए

महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है।

फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती

बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं

बाप के सामने अय्याशी… और हमारे सामने बदमाशी.. बेटा, भूल कर भी मत करियो..

खौफ तो आवारा कुत्ते भी मचाते है पर दहशत हमेशा शेर की ही रहती है

जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए

महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है।

फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती

बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं

बाप के सामने अय्याशी… और हमारे सामने बदमाशी.. बेटा, भूल कर भी मत करियो..