रुठुंगा अगर तुजसे तो इस कदर रुठुंगा की ,, ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी
शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा
रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही
शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है
रुठुंगा अगर तुजसे तो इस कदर रुठुंगा की ,, ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी
शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा
रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही
शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है