ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं

ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं

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डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।

ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा

झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .

आज भी हारी हुयी बाजी खेलना पसंद है हमें क्युकी हम किस्मत से ज्यादा अपने आप पे भरोसा करते है

कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।

ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा

झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .

आज भी हारी हुयी बाजी खेलना पसंद है हमें क्युकी हम किस्मत से ज्यादा अपने आप पे भरोसा करते है

कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं