तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो

तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो

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दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!

जैसा दोगे वैसा ही पाओगे.. फ़िर चाहे इज्ज़त हो या धोखा..!!

ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए

तेरा घमंड ही तुझे हराएगा मैं क्या हूँ ये तुझे वक़्त बताएगा

सीने में जिगर रखना पड़ता है छोटे हाथ में घोडा रखने से हर कोई बस्ती का रघु नहीं बन जाता

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!

जैसा दोगे वैसा ही पाओगे.. फ़िर चाहे इज्ज़त हो या धोखा..!!

ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए

तेरा घमंड ही तुझे हराएगा मैं क्या हूँ ये तुझे वक़्त बताएगा

सीने में जिगर रखना पड़ता है छोटे हाथ में घोडा रखने से हर कोई बस्ती का रघु नहीं बन जाता