बाप के सामने अय्याशी… और हमारे सामने बदमाशी.. बेटा, भूल कर भी मत करियो..

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मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो

हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को

मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता

मुझे सिंगल जान के तू तारीफ करेगा और मैं पट जाऊँगी? बेटा इतनी भी सीधी नहीं || “चल हट”

हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!

मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो

हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को

मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता

मुझे सिंगल जान के तू तारीफ करेगा और मैं पट जाऊँगी? बेटा इतनी भी सीधी नहीं || “चल हट”

हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!