हम तो बुरे है साफ कहते है, पर तुम जैसो से तो ऊपर वाला बचाए
शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी
मेरी औकात देखने के लिए तेरी भी औकात होनी जरुरी है
मेरे बारे में इतना मत सोचना , दिल में आता हु , समज में नही
शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
हम तो बुरे है साफ कहते है, पर तुम जैसो से तो ऊपर वाला बचाए
शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी
मेरी औकात देखने के लिए तेरी भी औकात होनी जरुरी है
मेरे बारे में इतना मत सोचना , दिल में आता हु , समज में नही
शायद कुछ लोग भूल गए है अपनी औक़ात लगता है फिर मैदान में आना पड़ेगा
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं