तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना
जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ
वक्त का ख़ास होना जरूरी नहीं है ख़ास के लिए वक्त होना जरूरी है
दुसरो की शर्तो पर सुल्तान बनने से कई गुना ज्यादा बेहतर है अपनी ही मौज का फकीर बने रहना
जैसी DP वैसा मैं !!
दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए
तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना
जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ
वक्त का ख़ास होना जरूरी नहीं है ख़ास के लिए वक्त होना जरूरी है
दुसरो की शर्तो पर सुल्तान बनने से कई गुना ज्यादा बेहतर है अपनी ही मौज का फकीर बने रहना
जैसी DP वैसा मैं !!
दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए