तू मोहब्बत थी इसलिए तुझे भाव दिया, वरना इग्नोर करने में मैंने पीएचडी की है
मेरे बारे में इतना मत सोचना , दिल में आता हु , समज में नही
मत पूछो कि कैसे हैं तुम कभी भूल नहीं पाओगे ऐसे हैं हम
गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता
दुनिया क्या सोचेगी ये मै कभी नहीं सोचता
घायल हु पर याद रखना घायल शेर की साँसे उसकी दहाड़ से भी ज़ादा खतरनाक होती है
तू मोहब्बत थी इसलिए तुझे भाव दिया, वरना इग्नोर करने में मैंने पीएचडी की है
मेरे बारे में इतना मत सोचना , दिल में आता हु , समज में नही
मत पूछो कि कैसे हैं तुम कभी भूल नहीं पाओगे ऐसे हैं हम
गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता
दुनिया क्या सोचेगी ये मै कभी नहीं सोचता
घायल हु पर याद रखना घायल शेर की साँसे उसकी दहाड़ से भी ज़ादा खतरनाक होती है