मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती
मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.
हम अपनी औकात जानते है कहो तो आपकी याद दिला दी
मैं तोह पहले से ही बिगड़ा हुआ हु तुम जैसे मेरा क्या बिगाड़ लोगे
ना मीठे हैं और न बनने की कोशिश करते हैं, हम तो वो सच हैं जो सबको कड़वे लगते हैं...
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती
मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.
हम अपनी औकात जानते है कहो तो आपकी याद दिला दी
मैं तोह पहले से ही बिगड़ा हुआ हु तुम जैसे मेरा क्या बिगाड़ लोगे
ना मीठे हैं और न बनने की कोशिश करते हैं, हम तो वो सच हैं जो सबको कड़वे लगते हैं...
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं