जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे
हम जैसे सिरफिरे ही इतिहास रचते हैं !समझदार तो केवल इतिहास पढ़ते हैं !!
तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे
हम जैसे सिरफिरे ही इतिहास रचते हैं !समझदार तो केवल इतिहास पढ़ते हैं !!
तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.