अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना
दिल की ख़ामोशी पर मत जाओ, राख के नीचे आग दबी होती है ..
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है।
जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए
अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना
दिल की ख़ामोशी पर मत जाओ, राख के नीचे आग दबी होती है ..
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है।
जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए