कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं