जब हमने स्कूल छोड़ा था तो ऐसा लगा जैसे खुशियों से नाता तोड़ा था.
बहुत दिनों बाद स्कूल के सामने से निकला तो स्कूल ने पूछा : मुझसे तो तू बहुत परेशान था अब ये बता कि जिन्दगी के इम्तिहान कैसे चल रहे हैं?
स्कूल तो ज्ञान का एक झरना है, जहाँ कुछ विद्यार्थी अपनी प्यास बुझाते हैं, कुछ एक दो घूँट पीते है और कुछ सिर्फ कुल्ला करते हैं
स्कूल पर पीते थे अंजुलि से पानी, कितनी दिल लुभानी थी स्कूल के दिनों की कहानी.
स्कूल के दिनों से ही कॉलेज जाने की बेसब्री रहती हैं क्योंकि जब मन होगा पढूँगा, जब मन होगा क्लास करूँगा और पूरी तरह आजाद रहूँगा.
स्कूल में पाठ पहले पढ़ाया जाता है और फिर परीक्षा ली जाती है जबकि जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सीखने को मिलता हैं.
जब हमने स्कूल छोड़ा था तो ऐसा लगा जैसे खुशियों से नाता तोड़ा था.
बहुत दिनों बाद स्कूल के सामने से निकला तो स्कूल ने पूछा : मुझसे तो तू बहुत परेशान था अब ये बता कि जिन्दगी के इम्तिहान कैसे चल रहे हैं?
स्कूल तो ज्ञान का एक झरना है, जहाँ कुछ विद्यार्थी अपनी प्यास बुझाते हैं, कुछ एक दो घूँट पीते है और कुछ सिर्फ कुल्ला करते हैं
स्कूल पर पीते थे अंजुलि से पानी, कितनी दिल लुभानी थी स्कूल के दिनों की कहानी.
स्कूल के दिनों से ही कॉलेज जाने की बेसब्री रहती हैं क्योंकि जब मन होगा पढूँगा, जब मन होगा क्लास करूँगा और पूरी तरह आजाद रहूँगा.
स्कूल में पाठ पहले पढ़ाया जाता है और फिर परीक्षा ली जाती है जबकि जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सीखने को मिलता हैं.