स्कूल पर पीते थे अंजुलि से पानी, कितनी दिल लुभानी थी स्कूल के दिनों की कहानी.
जिन्दगी का कोई रूल नहीं होता हैं जो माँ-बाप अपने बच्चे को सिखाते हैं उसे सिखाने का कोई स्कूल नहीं होता हैं.
स्कूल में पाठ पहले पढ़ाया जाता है और फिर परीक्षा ली जाती है जबकि जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सीखने को मिलता हैं.
जब एक विद्यार्थी स्कूल जाता है तो उस स्कूल के महत्व को अच्छी तरह नहीं समझ पाता है परन्तु जब वह स्कूल की कीमत अच्छी तरह समझ जाता है तो फिर स्कूल नहीं जा पाता हैं.
कॉलेज के दिन, दोस्तों के बिन अच्छे नहीं लगते हैं.
जब मैं अपने जीवन में सफल हुआ तो मुझे अपने गुरू की वो फटकार याद आई, पढ़ाई का काम पूरा न होने पर उनकी हल्की सी मार याद आई.
स्कूल पर पीते थे अंजुलि से पानी, कितनी दिल लुभानी थी स्कूल के दिनों की कहानी.
जिन्दगी का कोई रूल नहीं होता हैं जो माँ-बाप अपने बच्चे को सिखाते हैं उसे सिखाने का कोई स्कूल नहीं होता हैं.
स्कूल में पाठ पहले पढ़ाया जाता है और फिर परीक्षा ली जाती है जबकि जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सीखने को मिलता हैं.
जब एक विद्यार्थी स्कूल जाता है तो उस स्कूल के महत्व को अच्छी तरह नहीं समझ पाता है परन्तु जब वह स्कूल की कीमत अच्छी तरह समझ जाता है तो फिर स्कूल नहीं जा पाता हैं.
कॉलेज के दिन, दोस्तों के बिन अच्छे नहीं लगते हैं.
जब मैं अपने जीवन में सफल हुआ तो मुझे अपने गुरू की वो फटकार याद आई, पढ़ाई का काम पूरा न होने पर उनकी हल्की सी मार याद आई.