गुलदस्ता मेरे हाथ में चेहरे पर मुस्कान ऐ जाने वाले रखना अपना ध्यान ..

गुलदस्ता मेरे हाथ में चेहरे पर मुस्कान ऐ जाने वाले रखना अपना ध्यान ..

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किस तरह से शुक्रिया कहें आपको, जमीन से उठा कर दिल में बिठा लिया, नजरों में समां कर, पलकों पर सजा दिया, इतना प्यार दिया आपने हमको कि मेरे बिखरे शब्दों को कविता बना दिया.–

हर एक व्यक्ति को अपने जीवन में, अपने द्वारा की गयी गलतियों को धन्यवाद देना चाहिए. –

मुझे पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए धन्यवाद मुझे सही-गलत की पहचान सिखाने के लिए धन्यवाद मुझे बड़े सपने देखने और आकाश को चूमने का साहस देने के लिए धन्यवाद मेरा मित्र, गुरु और प्रकाश बनने के लिए धन्यवाद

मुबारक़ कहें कैसे कैसे कहें शुक्रिया अभी शुरू भी न हो सकी गुफ़्तगू कैसे कहें अलविदा ..

मैं तो कांच का टुकड़ा था तुमने ही हीरा बनाया, कैसे शुक्रिया अदा करूँ तूने जो जीना सिखा दिया.

ओ सर्दियों की मनमोहिनी धूप तेरा शुक्रिया हे सूर्य नारायण तेरा शुक्रिया ओ ठिठुरन से मुक्ति दिलाने वाले तेरा शुक्रिया शक्ति के संचारी तेरा शुक्रिया तुमसे ही तो ठंडे पड़े रिश्तो में गरमाहट आयी हे गरमाहट के देव तेरा शुक्रिया सौंधी सौंधी धूप में छिटपुट खेलो के लिए शुक्रिया हे जगदीश्वर तेरा शुक्रिया

किस तरह से शुक्रिया कहें आपको, जमीन से उठा कर दिल में बिठा लिया, नजरों में समां कर, पलकों पर सजा दिया, इतना प्यार दिया आपने हमको कि मेरे बिखरे शब्दों को कविता बना दिया.–

हर एक व्यक्ति को अपने जीवन में, अपने द्वारा की गयी गलतियों को धन्यवाद देना चाहिए. –

मुझे पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए धन्यवाद मुझे सही-गलत की पहचान सिखाने के लिए धन्यवाद मुझे बड़े सपने देखने और आकाश को चूमने का साहस देने के लिए धन्यवाद मेरा मित्र, गुरु और प्रकाश बनने के लिए धन्यवाद

मुबारक़ कहें कैसे कैसे कहें शुक्रिया अभी शुरू भी न हो सकी गुफ़्तगू कैसे कहें अलविदा ..

मैं तो कांच का टुकड़ा था तुमने ही हीरा बनाया, कैसे शुक्रिया अदा करूँ तूने जो जीना सिखा दिया.

ओ सर्दियों की मनमोहिनी धूप तेरा शुक्रिया हे सूर्य नारायण तेरा शुक्रिया ओ ठिठुरन से मुक्ति दिलाने वाले तेरा शुक्रिया शक्ति के संचारी तेरा शुक्रिया तुमसे ही तो ठंडे पड़े रिश्तो में गरमाहट आयी हे गरमाहट के देव तेरा शुक्रिया सौंधी सौंधी धूप में छिटपुट खेलो के लिए शुक्रिया हे जगदीश्वर तेरा शुक्रिया