किस तरह से शुक्रिया कहें आपको, ज़मीन से उठा कर दिल में बिठा लिया, नज़रों में समां कर, पलकों पे सजा दिया, इतना प्यार दिया आपने हमको, कि मेरे बिखरे शब्दों को कविता बना दिया… Thank You
तुम ही तो थे, जिसने थामा था मेरा हाथ दूर थे जब सभी, तब दिया था मेरा साथ। साथ हैं आज भी, जैसे चांद और रात अंधेरों में भी अब, डरने की क्या बात। आज तहे दिल से, शुक्रिया अदा तुम्हारा करती हूं
गुलदस्ता मेरे हाथ में चेहरे पर मुस्कान ऐ जाने वाले रखना अपना ध्यान ..
आपकी दुआओं ने दिन को खुशनुमा बना दिया खुल के जीने का उमंग दिल में जगा दिया आपकी बधाई के लिए आपका शुक्रिया.
ऐ खुदा, धन्यवाद… जीवन में दुःख, मुसीबत, जोखिम और चुनौतियों को देने के लिए, क्योंकि मैंने अपने जीवन में सबसे अधिक ऐसे ही हलातों में सीखा हैं.
मैं शुक्रगुजार हूँ…उन तमाम लोगो का जिन्होंने बुरे वक्त में मेरा साथ छोड़ा क्योकि उन्हें भरोसा था कि मैं मुसीबतों से अकेला ही निपट सकता हूँ.
किस तरह से शुक्रिया कहें आपको, ज़मीन से उठा कर दिल में बिठा लिया, नज़रों में समां कर, पलकों पे सजा दिया, इतना प्यार दिया आपने हमको, कि मेरे बिखरे शब्दों को कविता बना दिया… Thank You
तुम ही तो थे, जिसने थामा था मेरा हाथ दूर थे जब सभी, तब दिया था मेरा साथ। साथ हैं आज भी, जैसे चांद और रात अंधेरों में भी अब, डरने की क्या बात। आज तहे दिल से, शुक्रिया अदा तुम्हारा करती हूं
गुलदस्ता मेरे हाथ में चेहरे पर मुस्कान ऐ जाने वाले रखना अपना ध्यान ..
आपकी दुआओं ने दिन को खुशनुमा बना दिया खुल के जीने का उमंग दिल में जगा दिया आपकी बधाई के लिए आपका शुक्रिया.
ऐ खुदा, धन्यवाद… जीवन में दुःख, मुसीबत, जोखिम और चुनौतियों को देने के लिए, क्योंकि मैंने अपने जीवन में सबसे अधिक ऐसे ही हलातों में सीखा हैं.
मैं शुक्रगुजार हूँ…उन तमाम लोगो का जिन्होंने बुरे वक्त में मेरा साथ छोड़ा क्योकि उन्हें भरोसा था कि मैं मुसीबतों से अकेला ही निपट सकता हूँ.