बात ऐसी हो की जज़्बात कम ना हो खयालात ऐसे हों की कभी ग़म ना हो दिल के कोने में इतनी सी जगह रखना की खाली – खाली सा लगे जब हम ना हों ..
ओ सर्दियों की मनमोहिनी धूप तेरा शुक्रिया हे सूर्य नारायण तेरा शुक्रिया ओ ठिठुरन से मुक्ति दिलाने वाले तेरा शुक्रिया शक्ति के संचारी तेरा शुक्रिया तुमसे ही तो ठंडे पड़े रिश्तो में गरमाहट आयी हे गरमाहट के देव तेरा शुक्रिया सौंधी सौंधी धूप में छिटपुट खेलो के लिए शुक्रिया हे जगदीश्वर तेरा शुक्रिया
तुम ही तो थे, जिसने थामा था मेरा हाथ दूर थे जब सभी, तब दिया था मेरा साथ। साथ हैं आज भी, जैसे चांद और रात अंधेरों में भी अब, डरने की क्या बात। आज तहे दिल से, शुक्रिया अदा तुम्हारा करती हूं
गुलदस्ता मेरे हाथ में चेहरे पर मुस्कान ऐ जाने वाले रखना अपना ध्यान ..
आपकी दुआओं ने दिन को खुशनुमा बना दिया खुल के जीने का उमंग दिल में जगा दिया आपकी बधाई के लिए आपका शुक्रिया.
सिर्फ इशारों में होती महोब्बत अगर, इन अलफाजों को खुबसूरती कौन देता बस पत्थर बन के रह जाता ‘ताज महल’ अगर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता
बात ऐसी हो की जज़्बात कम ना हो खयालात ऐसे हों की कभी ग़म ना हो दिल के कोने में इतनी सी जगह रखना की खाली – खाली सा लगे जब हम ना हों ..
ओ सर्दियों की मनमोहिनी धूप तेरा शुक्रिया हे सूर्य नारायण तेरा शुक्रिया ओ ठिठुरन से मुक्ति दिलाने वाले तेरा शुक्रिया शक्ति के संचारी तेरा शुक्रिया तुमसे ही तो ठंडे पड़े रिश्तो में गरमाहट आयी हे गरमाहट के देव तेरा शुक्रिया सौंधी सौंधी धूप में छिटपुट खेलो के लिए शुक्रिया हे जगदीश्वर तेरा शुक्रिया
तुम ही तो थे, जिसने थामा था मेरा हाथ दूर थे जब सभी, तब दिया था मेरा साथ। साथ हैं आज भी, जैसे चांद और रात अंधेरों में भी अब, डरने की क्या बात। आज तहे दिल से, शुक्रिया अदा तुम्हारा करती हूं
गुलदस्ता मेरे हाथ में चेहरे पर मुस्कान ऐ जाने वाले रखना अपना ध्यान ..
आपकी दुआओं ने दिन को खुशनुमा बना दिया खुल के जीने का उमंग दिल में जगा दिया आपकी बधाई के लिए आपका शुक्रिया.
सिर्फ इशारों में होती महोब्बत अगर, इन अलफाजों को खुबसूरती कौन देता बस पत्थर बन के रह जाता ‘ताज महल’ अगर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता