मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें
अगर नियत अच्छी हो तो नसीब कभी बुरा नहीं होता
समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!
शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी
बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं
दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है
मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें
अगर नियत अच्छी हो तो नसीब कभी बुरा नहीं होता
समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!
शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी
बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं
दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है