मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
तुम सिर्फ मेरे हो अब इससे प्यार समझो या क़ब्ज़ा
वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
लोग केहते है की मेरे दोस्त कम है लेकीन, वोह नही जानते की मेरे दोस्तो मे कीतना "दम" हैं
हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
तुम सिर्फ मेरे हो अब इससे प्यार समझो या क़ब्ज़ा
वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
लोग केहते है की मेरे दोस्त कम है लेकीन, वोह नही जानते की मेरे दोस्तो मे कीतना "दम" हैं
हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है