रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..

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मुझे सिंगल जान के तू तारीफ करेगा और मैं पट जाऊँगी? बेटा इतनी भी सीधी नहीं || “चल हट”

डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।

ना मीठे हैं और न बनने की कोशिश करते हैं, हम तो वो सच हैं जो सबको कड़वे लगते हैं...

मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती

बेटा झूले पे झूल लेकिन अपनी औकात मत भूल

पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.

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