परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो हिसाब सबका होगा कोई कितना भी बड़ा नवाब हो
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं
रिश्तो को वक़्त और हालत बदल देते है अब तेरा ज़िकर होने पर हम बात बदल देते है
ज़ारा दिल का दर्द कम होने दो फ़िर लोगों की उनकी औक़ात याद दिलाएंगे
परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो हिसाब सबका होगा कोई कितना भी बड़ा नवाब हो
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं
रिश्तो को वक़्त और हालत बदल देते है अब तेरा ज़िकर होने पर हम बात बदल देते है
ज़ारा दिल का दर्द कम होने दो फ़िर लोगों की उनकी औक़ात याद दिलाएंगे