हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है

हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है

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मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

हम बाते हालत के हिसाब से करते है

अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं

ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो

रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..

Ek वो ‪pagali‬ हैं जो मुझे समजती nahi..Or यहाँ Jamana मेरे ‪Status‬ ko dekhke दीवाना हुआ Ja रहा है

मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

हम बाते हालत के हिसाब से करते है

अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं

ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो

रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..

Ek वो ‪pagali‬ हैं जो मुझे समजती nahi..Or यहाँ Jamana मेरे ‪Status‬ ko dekhke दीवाना हुआ Ja रहा है