हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है

हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है

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गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई

ज़िद्दी हु गुस्से वाला हु बद्तमीज़ हु बेपरवाह भी हु लेकिन मेने कभी किसी को धोखा नहीं दिया

नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....

हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है

बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए

इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं

गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई

ज़िद्दी हु गुस्से वाला हु बद्तमीज़ हु बेपरवाह भी हु लेकिन मेने कभी किसी को धोखा नहीं दिया

नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....

हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है

बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए

इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं