टूटे हुए सपने और छूटे हुए अपने जिन्दगी में बार-बार नहीं मिलते हैं इसलिए इनकी चीजों की कद्र करो।
जब बच्चे थे तब अधूरे एहसास, टूटे सपने, अधूरे होमवर्क और टूटे खिलौने सब अच्छे लगते थे.
नींद चुराने वाले हमसे पूछते हैं सोते क्यों नहीं हो, इतनी ही फ़िक्र है तुम्हें तो फिर हमारे होते क्यों नहीं हो
अगर दुआ कबूल न हो तो लोग भगवान भी बदल देते हैं.
जो इंसान खुद और खुद के सपने के बारे में नहीं सोचता, वो दरअसल सोचता ही नही हैं.
अपने ही लोग लूट लेते है, वरना गैरों को क्या मालूम कि दिल की दीवार कहाँ से कमजोर है।
टूटे हुए सपने और छूटे हुए अपने जिन्दगी में बार-बार नहीं मिलते हैं इसलिए इनकी चीजों की कद्र करो।
जब बच्चे थे तब अधूरे एहसास, टूटे सपने, अधूरे होमवर्क और टूटे खिलौने सब अच्छे लगते थे.
नींद चुराने वाले हमसे पूछते हैं सोते क्यों नहीं हो, इतनी ही फ़िक्र है तुम्हें तो फिर हमारे होते क्यों नहीं हो
अगर दुआ कबूल न हो तो लोग भगवान भी बदल देते हैं.
जो इंसान खुद और खुद के सपने के बारे में नहीं सोचता, वो दरअसल सोचता ही नही हैं.
अपने ही लोग लूट लेते है, वरना गैरों को क्या मालूम कि दिल की दीवार कहाँ से कमजोर है।