Emotions में इतना ज्यादा बह जाना भी ठीक नहीं होता है, कि आप गलत का साथ देने लगें और सच से नजरें चुराने लगें.

Emotions में इतना ज्यादा बह जाना भी ठीक नहीं होता है, कि आप गलत का साथ देने लगें और सच से नजरें चुराने लगें.

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कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं

जो लोग जरूरत से ज्यादा Emotional होते हैं, वो लोग बेवफाओं के चक्कर में अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेते हैं.

इश्क कोई क्यों करता है, इसे जान लेना जरूरी है, इसके बिना कैसे जिए कोई बिन इसके ज़िन्दगी अधूरी है.

इतना भी आसान नहीं होता अपनी जिन्दगी को जी पाना, बहुत लोगों को खटकने लगते हैं जब हम खुद को जीने लगते हैं’।

जो लोग अन्दर से मर जाते है, अक्सर वही लोग दूसरो को जीना सिखाते है।

अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।

कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं

जो लोग जरूरत से ज्यादा Emotional होते हैं, वो लोग बेवफाओं के चक्कर में अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेते हैं.

इश्क कोई क्यों करता है, इसे जान लेना जरूरी है, इसके बिना कैसे जिए कोई बिन इसके ज़िन्दगी अधूरी है.

इतना भी आसान नहीं होता अपनी जिन्दगी को जी पाना, बहुत लोगों को खटकने लगते हैं जब हम खुद को जीने लगते हैं’।

जो लोग अन्दर से मर जाते है, अक्सर वही लोग दूसरो को जीना सिखाते है।

अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।