जो लोग अन्दर से मर जाते है, अक्सर वही लोग दूसरो को जीना सिखाते है।
वो जो सबके सामने कभी जिक्र नहीं करता, अन्दर ही अन्दर बहुत फ़िक्र करता है।
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।
ये सागर भी तुम्हारी तरह बेवफा निकला, जिन्दा थे तब तैरने नहीं दिया और जब मर गए हैं तो डूबने भी नहीं देता।
जो व्यक्ति आपकी भावनाओं को नहीं समझता हो, उससे बहुत ज्यादा नजदीकी नहीं बढ़ानी चाहिए.
जो लोग अन्दर से मर जाते है, अक्सर वही लोग दूसरो को जीना सिखाते है।
वो जो सबके सामने कभी जिक्र नहीं करता, अन्दर ही अन्दर बहुत फ़िक्र करता है।
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।
ये सागर भी तुम्हारी तरह बेवफा निकला, जिन्दा थे तब तैरने नहीं दिया और जब मर गए हैं तो डूबने भी नहीं देता।
जो व्यक्ति आपकी भावनाओं को नहीं समझता हो, उससे बहुत ज्यादा नजदीकी नहीं बढ़ानी चाहिए.