इतना भी आसान नहीं होता अपनी जिन्दगी जी पाना, बहुत लोगो को खटकने लगते है… जब हम खुद को जीने लगते है।

इतना भी आसान नहीं होता अपनी जिन्दगी जी पाना, बहुत लोगो को खटकने लगते है… जब हम खुद को जीने लगते है।

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कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं

नींद चुराने वाले हमसे पूछते हैं सोते क्यों नहीं हो, इतनी ही फ़िक्र है तुम्हें तो फिर हमारे होते क्यों नहीं हो

वो जो सबके सामने कभी जिक्र नहीं करता, अन्दर ही अन्दर बहुत फ़िक्र करता है।

मरने वाले आदमी के लिए रोने वाले हजारों मिल जाएंगे, मगर जो आदमी जिन्दा है उसे समझने वाला कोई भी नही मिलेगा।

दुःख से पता नहीं क्यों लोग डरते हैं लोग जबकि हमारे जीवन की शुरुआत ही रोने से हुई है.

अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।

कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं

नींद चुराने वाले हमसे पूछते हैं सोते क्यों नहीं हो, इतनी ही फ़िक्र है तुम्हें तो फिर हमारे होते क्यों नहीं हो

वो जो सबके सामने कभी जिक्र नहीं करता, अन्दर ही अन्दर बहुत फ़िक्र करता है।

मरने वाले आदमी के लिए रोने वाले हजारों मिल जाएंगे, मगर जो आदमी जिन्दा है उसे समझने वाला कोई भी नही मिलेगा।

दुःख से पता नहीं क्यों लोग डरते हैं लोग जबकि हमारे जीवन की शुरुआत ही रोने से हुई है.

अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।