इस दिल ने कभी भी किसी का बुरा नहीं चाहा, ये बात और है कि मुझे ये साबित करना नहीं आया।
वो लोग बहुत मजबूत हो जाते है, जिनके पास खोने के लिए कुछ भी नही होता।
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।
वो इंसान जो सबके सामने कभी जिक्र भी नहीं करता, अन्दर ही अन्दर आपकी बहुत फ़िक्र करता है।
क्या पता था कि मोहब्बत ही हो जाएगी, हमें तो बस तुम्हारा मुस्कुराना अच्छा लगा था
इस दिल ने कभी भी किसी का बुरा नहीं चाहा, ये बात और है कि मुझे ये साबित करना नहीं आया।
वो लोग बहुत मजबूत हो जाते है, जिनके पास खोने के लिए कुछ भी नही होता।
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।
वो इंसान जो सबके सामने कभी जिक्र भी नहीं करता, अन्दर ही अन्दर आपकी बहुत फ़िक्र करता है।
क्या पता था कि मोहब्बत ही हो जाएगी, हमें तो बस तुम्हारा मुस्कुराना अच्छा लगा था