आज इस दौर में, हसीं में छुपी मस्ती कहाँ, और लबो की मुस्कान इतनी सस्ती कहाँ…
में थोडा व्यस्त क्या हो गया, प्रेम का सूरज अस्त हो गया …..
जिंदगी को भी कशमकश ही बना दिया है हमने, व्यस्त तो जरुर है इसे जीने में, बेखबर इसके मकसद से….
कहने को तो कई अपने थे मेरे , पर वो जरा व्यस्त थे अपनी दुनियां में , उनमे से कुछ ही थे जो समय निकल पाये, मेरे लिए मेरे बुरे समय में …..
मोबाइल Busy होने पर भी अब तो रिश्तो में दरार आ जाते है ना जाने प्यार से बचने के लिए लोग कितने बहाने बनाते है.
हम इतने व्यस्त, मतलबी और बेदिल हो चुके है की, बेवजह किसी से बात करना भी अजीब लगता है….
आज इस दौर में, हसीं में छुपी मस्ती कहाँ, और लबो की मुस्कान इतनी सस्ती कहाँ…
में थोडा व्यस्त क्या हो गया, प्रेम का सूरज अस्त हो गया …..
जिंदगी को भी कशमकश ही बना दिया है हमने, व्यस्त तो जरुर है इसे जीने में, बेखबर इसके मकसद से….
कहने को तो कई अपने थे मेरे , पर वो जरा व्यस्त थे अपनी दुनियां में , उनमे से कुछ ही थे जो समय निकल पाये, मेरे लिए मेरे बुरे समय में …..
मोबाइल Busy होने पर भी अब तो रिश्तो में दरार आ जाते है ना जाने प्यार से बचने के लिए लोग कितने बहाने बनाते है.
हम इतने व्यस्त, मतलबी और बेदिल हो चुके है की, बेवजह किसी से बात करना भी अजीब लगता है….