पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.

पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.

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ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा

झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

ये जो हालात है मेरे एक दिन सुधर जाएगे मगर काफी लोग मेरे दिल से उतर जाएगे.

आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके

मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.

ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा

झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

ये जो हालात है मेरे एक दिन सुधर जाएगे मगर काफी लोग मेरे दिल से उतर जाएगे.

आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके

मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.