अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
किस्मत से लड़ने में मजा आ रहा है ना किस्मत मुझे जीतने दे रही है ना मैं हार मान रहा हूँ.
सुनो किसी के पास तमीज का नंबर है सब कहते हैं तमीज से बात करो
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता
अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
किस्मत से लड़ने में मजा आ रहा है ना किस्मत मुझे जीतने दे रही है ना मैं हार मान रहा हूँ.
सुनो किसी के पास तमीज का नंबर है सब कहते हैं तमीज से बात करो
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता