गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
ख़्वाहिशों का कैदी हूँ, मुझे हकीक़तें सज़ा देती हैं!
मेरा तो एक ही उसूल है प्यार हद से ज्यादा और नफ़रत उससे भी ज्यादा
हम दोनों बराबर जिद्दी रहे हमेशा ना उसने गुस्सा कम किया ना मैंने प्यार
तुझे शिकायत है कि मुझे बदल दिया वक़्त ने कभी खुद से भी तो सवाल कर क्या तू वही है
दुनिया का उसूल है जब तक काम है तेरा नाम है वरना दूर से सलाम है
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
ख़्वाहिशों का कैदी हूँ, मुझे हकीक़तें सज़ा देती हैं!
मेरा तो एक ही उसूल है प्यार हद से ज्यादा और नफ़रत उससे भी ज्यादा
हम दोनों बराबर जिद्दी रहे हमेशा ना उसने गुस्सा कम किया ना मैंने प्यार
तुझे शिकायत है कि मुझे बदल दिया वक़्त ने कभी खुद से भी तो सवाल कर क्या तू वही है
दुनिया का उसूल है जब तक काम है तेरा नाम है वरना दूर से सलाम है