मेरी बदमाशी का अंदाज़ा तुम इस चीज़ से लागलो जब में शरीफ था तब भी लोग मुझे बदमाश कह कर बुलाते थे
में तो पहले से बदनाम हु तुम शरीफ लोग मेरा क्या उखाड़ लोगे
जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है
हमारी खामोशी को हमारा घमंड ना समझो बस कुछ ठोकरे ऐसी लगी है कि बोलने को मन नहीं करता.
रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
मेरी बदमाशी का अंदाज़ा तुम इस चीज़ से लागलो जब में शरीफ था तब भी लोग मुझे बदमाश कह कर बुलाते थे
में तो पहले से बदनाम हु तुम शरीफ लोग मेरा क्या उखाड़ लोगे
जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है
हमारी खामोशी को हमारा घमंड ना समझो बस कुछ ठोकरे ऐसी लगी है कि बोलने को मन नहीं करता.
रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.