जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!

जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!

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अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है

ज़ारा दिल का दर्द कम होने दो फ़िर लोगों की उनकी औक़ात याद दिलाएंगे

जिस दिन कामयाबी मिलेगी उस दिन मेरे ही चर्चे होंगे, उनकी एक महीने की इनकम मेरे एक दिन के खर्चे होंगे

बोलना तो सब जानते हैं पर कब और क्या बोलना है यह बहुत ही कम लोग जानते हैं

कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है

अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है

ज़ारा दिल का दर्द कम होने दो फ़िर लोगों की उनकी औक़ात याद दिलाएंगे

जिस दिन कामयाबी मिलेगी उस दिन मेरे ही चर्चे होंगे, उनकी एक महीने की इनकम मेरे एक दिन के खर्चे होंगे

बोलना तो सब जानते हैं पर कब और क्या बोलना है यह बहुत ही कम लोग जानते हैं

कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है