जिन्हें हम फरिस्ता समझते हैं अक्सर वो हीं हमें धोखा देते हैं.
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
लोग प्यार में धोखा और झूठ तो बोल देते हैं.. माना बेवकूफ़ भी बना लेते हैं.. पर ऊपर वाले को कैसे बना पाओगे.. ये भूल जाते हैं..
जब जब तेरी याद पास आती है मेरे….. मैं तेरे दिए धोखे और बेवफ़ाई को याद कर लेती हूँ..!!
धोखा कभी गैरों से नहीं मिलता, विश्वास तो अपने तोड़ जाते है।
जो लोग किसी को खुदा समझ लेते हैं, वे अक्सर धोखे के शिकार होते हैं.
जिन्हें हम फरिस्ता समझते हैं अक्सर वो हीं हमें धोखा देते हैं.
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
लोग प्यार में धोखा और झूठ तो बोल देते हैं.. माना बेवकूफ़ भी बना लेते हैं.. पर ऊपर वाले को कैसे बना पाओगे.. ये भूल जाते हैं..
जब जब तेरी याद पास आती है मेरे….. मैं तेरे दिए धोखे और बेवफ़ाई को याद कर लेती हूँ..!!
धोखा कभी गैरों से नहीं मिलता, विश्वास तो अपने तोड़ जाते है।
जो लोग किसी को खुदा समझ लेते हैं, वे अक्सर धोखे के शिकार होते हैं.