जो एक बार धोखा दे चुका हो, उससे फिर धोखा खाना महामूर्खता है.
एक गलती की थी मैंने, आज उसी की सजा पाई थी, उसके यार ने ही सही, उसकी असलियत बताई थी, वो दिखती है अब किसी ओर के साथ, ये बात तुमसे नहीं, गैरों ने मुझे बताई थी !!
एक ही सिक्के के दो पहलू होते है। सिक्का कब पलट जाए, कहा नहीं जा सकता!
गलती तेरी नहीं की तूने मुझे धोखा दिया गलती मेरी थी जो मैंने तुझे मौका दिया!
यहाँ पर अब न कर बात तू मोहब्बत कि साहेब हर कोई इस रास्ते से गुजरा हुआ है..! कुछ ने धोखा दिया हुआ है..! तो कुछ ने धोखा खाया हुआ है..!!
हर किसी पर भरोसा करने वाले लोग जरुर धोखा खाते हैं.
जो एक बार धोखा दे चुका हो, उससे फिर धोखा खाना महामूर्खता है.
एक गलती की थी मैंने, आज उसी की सजा पाई थी, उसके यार ने ही सही, उसकी असलियत बताई थी, वो दिखती है अब किसी ओर के साथ, ये बात तुमसे नहीं, गैरों ने मुझे बताई थी !!
एक ही सिक्के के दो पहलू होते है। सिक्का कब पलट जाए, कहा नहीं जा सकता!
गलती तेरी नहीं की तूने मुझे धोखा दिया गलती मेरी थी जो मैंने तुझे मौका दिया!
यहाँ पर अब न कर बात तू मोहब्बत कि साहेब हर कोई इस रास्ते से गुजरा हुआ है..! कुछ ने धोखा दिया हुआ है..! तो कुछ ने धोखा खाया हुआ है..!!
हर किसी पर भरोसा करने वाले लोग जरुर धोखा खाते हैं.