हम शिकवा करें क्या किसी से, यहाँ हर ओर बेवफाई है। उसे धोखा दिया किसी और ने, उसकी भी सजा हमने पाई है।।

हम शिकवा करें क्या किसी से, यहाँ हर ओर बेवफाई है। उसे धोखा दिया किसी और ने, उसकी भी सजा हमने पाई है।।

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जानते हैं, वो मुझे धोखा दे रहा, जानते हैं सिर्फ़ इस्तेमाल कर रहा, जानते हैं, अब दूर हो जाना चाहिए, जानते हैं सब पर मानते क्यों नहीं…

हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!

बिन मागें जो मिल जाए वो है धोखा और फरेब, और जो मांगकर भी ना मिले वो है सच्चा इश्क….।

जिन्हें हम फरिस्ता समझते हैं अक्सर वो हीं हमें धोखा देते हैं.

जब जब तेरी याद पास आती है मेरे….. मैं तेरे दिए धोखे और बेवफ़ाई को याद कर लेती हूँ..!!

हर किसी पर भरोसा करने वाले लोग जरुर धोखा खाते हैं.

जानते हैं, वो मुझे धोखा दे रहा, जानते हैं सिर्फ़ इस्तेमाल कर रहा, जानते हैं, अब दूर हो जाना चाहिए, जानते हैं सब पर मानते क्यों नहीं…

हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!

बिन मागें जो मिल जाए वो है धोखा और फरेब, और जो मांगकर भी ना मिले वो है सच्चा इश्क….।

जिन्हें हम फरिस्ता समझते हैं अक्सर वो हीं हमें धोखा देते हैं.

जब जब तेरी याद पास आती है मेरे….. मैं तेरे दिए धोखे और बेवफ़ाई को याद कर लेती हूँ..!!

हर किसी पर भरोसा करने वाले लोग जरुर धोखा खाते हैं.