दिवारों के पीछे क्या किरदार हूँ मै? यह राज़ मेरे आंगन तक को नहीं पता है, तुम बस इतना समझ लो इश्क मे बरबाद हो गया, उसका नाम क्या था यह किसी और दिन बताएंगे,
जब भी हम किसी और पर अन्धविश्वास करते हैं, तो हम खुद को धोखा दे रहे होते हैं.
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
जो लोग किसी को खुदा समझ लेते हैं, वे अक्सर धोखे के शिकार होते हैं.
जिन्दगी से दोस्ती कर लीजिए क्योंकि एक यही हैं जिस पर आप पूरी तरह से विश्वास कर सकते हैं, हालाँकि यह भी धोखा देती हैं लेकिन सिर्फ एक बार|
दिवारों के पीछे क्या किरदार हूँ मै? यह राज़ मेरे आंगन तक को नहीं पता है, तुम बस इतना समझ लो इश्क मे बरबाद हो गया, उसका नाम क्या था यह किसी और दिन बताएंगे,
जब भी हम किसी और पर अन्धविश्वास करते हैं, तो हम खुद को धोखा दे रहे होते हैं.
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
जो लोग किसी को खुदा समझ लेते हैं, वे अक्सर धोखे के शिकार होते हैं.
जिन्दगी से दोस्ती कर लीजिए क्योंकि एक यही हैं जिस पर आप पूरी तरह से विश्वास कर सकते हैं, हालाँकि यह भी धोखा देती हैं लेकिन सिर्फ एक बार|