हम शिकवा करें क्या किसी से, यहाँ हर ओर बेवफाई है। उसे धोखा दिया किसी और ने, उसकी भी सजा हमने पाई है।।

हम शिकवा करें क्या किसी से, यहाँ हर ओर बेवफाई है। उसे धोखा दिया किसी और ने, उसकी भी सजा हमने पाई है।।

Share:

More Like This

जीते जी मौत से रूबरू होना है तो किसी बेवफा से मोहब्बत कर लो

धोखा तो हम भी दे सकते थे पर उस खेल में मजा नहीं ।। जिस खेल को खेलने से दिल टूटे ?

एक ही सिक्के के दो पहलू होते है। सिक्का कब पलट जाए, कहा नहीं जा सकता!

बात चल निकली है तुम इश्क नहीं करते सब जान गए हैं तुम फरेब अच्छा नहीं करते जेब काटने आए थे बावला समझकर अंजाम भी चाहिए ब्लेड भी तीखा नहीं करते !!

गलती और धोखा में फर्क होता है आप जितनी जल्दी समझ जाओ उतना ही अच्छा है। गलतियां माफ की जा सकती है धोखा नहीं ।।

अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!

जीते जी मौत से रूबरू होना है तो किसी बेवफा से मोहब्बत कर लो

धोखा तो हम भी दे सकते थे पर उस खेल में मजा नहीं ।। जिस खेल को खेलने से दिल टूटे ?

एक ही सिक्के के दो पहलू होते है। सिक्का कब पलट जाए, कहा नहीं जा सकता!

बात चल निकली है तुम इश्क नहीं करते सब जान गए हैं तुम फरेब अच्छा नहीं करते जेब काटने आए थे बावला समझकर अंजाम भी चाहिए ब्लेड भी तीखा नहीं करते !!

गलती और धोखा में फर्क होता है आप जितनी जल्दी समझ जाओ उतना ही अच्छा है। गलतियां माफ की जा सकती है धोखा नहीं ।।

अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!