लोग प्यार में धोखा और झूठ तो बोल देते हैं.. माना बेवकूफ़ भी बना लेते हैं.. पर ऊपर वाले को कैसे बना पाओगे.. ये भूल जाते हैं..
खुद को मैंने उसमें, मैं तो नहीं मिला कहीं, मिला तो बस धोखा, जिससे उठ गया भरोसा, प्यार पर से मेरा..!!
धोखा कभी गैरों से नहीं मिलता, विश्वास तो अपने तोड़ जाते है।
जो एक बार धोखा दे चुका हो, उससे फिर धोखा खाना महामूर्खता है.
कोई था क्या नशा तेरी आँखों के बराबर? कोई होगा क्या नशा तेरे जाने के बाद? सब ठीक तो था, बेवफाई करनी क्या जरुरी थी? छोडिए अब उनका जिक्र, हम फिर कोई मयखाना पी जाएंगे ।।
प्यार करने वालों में केवल कुछ खुशनसीब लोग हीं होते हैं, जिन्हें जीवन में कभी धोखा नहीं मिलता.
लोग प्यार में धोखा और झूठ तो बोल देते हैं.. माना बेवकूफ़ भी बना लेते हैं.. पर ऊपर वाले को कैसे बना पाओगे.. ये भूल जाते हैं..
खुद को मैंने उसमें, मैं तो नहीं मिला कहीं, मिला तो बस धोखा, जिससे उठ गया भरोसा, प्यार पर से मेरा..!!
धोखा कभी गैरों से नहीं मिलता, विश्वास तो अपने तोड़ जाते है।
जो एक बार धोखा दे चुका हो, उससे फिर धोखा खाना महामूर्खता है.
कोई था क्या नशा तेरी आँखों के बराबर? कोई होगा क्या नशा तेरे जाने के बाद? सब ठीक तो था, बेवफाई करनी क्या जरुरी थी? छोडिए अब उनका जिक्र, हम फिर कोई मयखाना पी जाएंगे ।।
प्यार करने वालों में केवल कुछ खुशनसीब लोग हीं होते हैं, जिन्हें जीवन में कभी धोखा नहीं मिलता.