“धोखे” की “फितरत” है,,, “धोखा” ही “खाने” की….!!!
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
तुने भी वही किया जो सब करते हैं, पास आया.. सपना दिखाया.. अपना बनाया.. और फिर बिना कसुर बीच रास्ते में ही छोड़ गए । ❤?❤
धोखा करके किसी के साथ वफा की उम्मीद करते हैं कुछ लोग बुरा करके अपने साथ अच्छा होने की दुआ करते हैं!
पत्थरों के शहर इश्क़ कमाया.. नैनों का धोखा दिल ने चुकाया
जिन्हें हम फरिस्ता समझते हैं अक्सर वो हीं हमें धोखा देते हैं.
“धोखे” की “फितरत” है,,, “धोखा” ही “खाने” की….!!!
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
तुने भी वही किया जो सब करते हैं, पास आया.. सपना दिखाया.. अपना बनाया.. और फिर बिना कसुर बीच रास्ते में ही छोड़ गए । ❤?❤
धोखा करके किसी के साथ वफा की उम्मीद करते हैं कुछ लोग बुरा करके अपने साथ अच्छा होने की दुआ करते हैं!
पत्थरों के शहर इश्क़ कमाया.. नैनों का धोखा दिल ने चुकाया
जिन्हें हम फरिस्ता समझते हैं अक्सर वो हीं हमें धोखा देते हैं.