नाम की दोस्ती काम की यारी दूसरों की तरह ये आदत नहीं हमारी
हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें
दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥
जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं, रातों से लड़ना पड़ता |
मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है
कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे
नाम की दोस्ती काम की यारी दूसरों की तरह ये आदत नहीं हमारी
हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें
दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥
जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं, रातों से लड़ना पड़ता |
मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है
कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे