खुशी से संतुष्टि मिलती है और संतुष्टि से खुशी मिलती है परन्तु फर्क बहुत बड़ा है “खुशी” थोड़े समय के लिए संतुष्टि देती है, और “संतुष्टि” हमेशा के लिए खुशी देती है
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
अगर नियत अच्छी हो तो नसीब कभी बुरा नहीं होता
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
हम जैसे सिरफिरे ही इतिहास रचते हैं !समझदार तो केवल इतिहास पढ़ते हैं !!
मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है
खुशी से संतुष्टि मिलती है और संतुष्टि से खुशी मिलती है परन्तु फर्क बहुत बड़ा है “खुशी” थोड़े समय के लिए संतुष्टि देती है, और “संतुष्टि” हमेशा के लिए खुशी देती है
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
अगर नियत अच्छी हो तो नसीब कभी बुरा नहीं होता
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
हम जैसे सिरफिरे ही इतिहास रचते हैं !समझदार तो केवल इतिहास पढ़ते हैं !!
मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है