हमारी ताकत का अंदाजा हमारे जोर से नही..दुश्मन के शोर से पता चलता है
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..
अच्छी किताबे,और अच्छे लोग..! तुरंत समझ में नहीं आते, उन्हें पढ़ना पड़ता है..
जिन्हे हम ज़हर लगते हे वो हमें खा कर मर जाये
तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
हमारी ताकत का अंदाजा हमारे जोर से नही..दुश्मन के शोर से पता चलता है
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..
अच्छी किताबे,और अच्छे लोग..! तुरंत समझ में नहीं आते, उन्हें पढ़ना पड़ता है..
जिन्हे हम ज़हर लगते हे वो हमें खा कर मर जाये
तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है