वह जो अपने परिवार से अत्यधिक जुड़ा हुआ है, उसे भय और चिंता का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सभी दुखों कि जड़ लगाव है. इसलिए खुश रहने कि लिए लगाव छोड़ देना चाहिए.

वह जो अपने परिवार से अत्यधिक जुड़ा हुआ है, उसे भय और चिंता का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सभी दुखों कि जड़ लगाव है. इसलिए खुश रहने कि लिए लगाव छोड़ देना चाहिए.

चाणक्य
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पैसे ने कभी किसी को ख़ुशी नहीं दी है, और न देगा, उसके स्वभाव में ऐसा कुछ नहीं है जिससे ख़ुशी उत्पन्न हो. ये जितना ज्यादा जिसके पास होता है वो उतना ही और इसे चाहता है .

बेंजामिन फ्रैंकलिन

जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.

थोमस मर्टन

याद रखिये ख़ुशी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कौन हैं या आपके पास क्या है; ये पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आप क्या सोचते हैं.

डेल कार्नेगी

प्रसन्नता कोई पहले से निर्मित वास्तु नहीं है. वो आपके कर्मो से आती है.

दलाई लामा

जो चाहा वो मिल जाना सफलता है. जो मिला उसको चाहना प्रसन्नता है.

कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिये जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हों. ऐसी मित्रता कभी आपको ख़ुशी नहीं देगी.

चाणक्य

पैसे ने कभी किसी को ख़ुशी नहीं दी है, और न देगा, उसके स्वभाव में ऐसा कुछ नहीं है जिससे ख़ुशी उत्पन्न हो. ये जितना ज्यादा जिसके पास होता है वो उतना ही और इसे चाहता है .

बेंजामिन फ्रैंकलिन

जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.

थोमस मर्टन

याद रखिये ख़ुशी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कौन हैं या आपके पास क्या है; ये पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आप क्या सोचते हैं.

डेल कार्नेगी

प्रसन्नता कोई पहले से निर्मित वास्तु नहीं है. वो आपके कर्मो से आती है.

दलाई लामा

जो चाहा वो मिल जाना सफलता है. जो मिला उसको चाहना प्रसन्नता है.

कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिये जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हों. ऐसी मित्रता कभी आपको ख़ुशी नहीं देगी.

चाणक्य