यदि आपकी ख़ुशी इस बात पर निर्भर करती है कि कोई और क्या करता है तो मेरा मानना है की आपको कोई समस्या है .
जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.
ख़ुशी की तरह दौलत भी कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलती. यह किसी उपयोगी सेवा के फलस्वरूप मिलती है.
प्रसन्नता वो पुरस्कार है जो हमे हमारी समझ के अनुरूप सबसे सही जीवन जीने पे मिलता है .
आपके जीवन की प्रसन्नता आपके विचारों की गुद्वात्ता पर निर्भर करती है .
जो चाहा वो मिल जाना सफलता है. जो मिला उसको चाहना प्रसन्नता है.
यदि आपकी ख़ुशी इस बात पर निर्भर करती है कि कोई और क्या करता है तो मेरा मानना है की आपको कोई समस्या है .
जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.
ख़ुशी की तरह दौलत भी कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलती. यह किसी उपयोगी सेवा के फलस्वरूप मिलती है.
प्रसन्नता वो पुरस्कार है जो हमे हमारी समझ के अनुरूप सबसे सही जीवन जीने पे मिलता है .
आपके जीवन की प्रसन्नता आपके विचारों की गुद्वात्ता पर निर्भर करती है .
जो चाहा वो मिल जाना सफलता है. जो मिला उसको चाहना प्रसन्नता है.