ख़ुशी की तरह दौलत भी कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलती. यह किसी उपयोगी सेवा के फलस्वरूप मिलती है.
कुछ लोग जहाँ जाते हैं वहां खुशियाँ लाते हैं, कुछ लोग जब जाते हैं तब खुशियाँ लाते हैं.
प्रसन्नता कोई पहले से निर्मित वास्तु नहीं है. वो आपके कर्मो से आती है.
जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.
कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिये जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हों. ऐसी मित्रता कभी आपको ख़ुशी नहीं देगी.
Next time when you think about a wonderful & beautiful thing in life don't forget to include YOURSELF in it.
ख़ुशी की तरह दौलत भी कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलती. यह किसी उपयोगी सेवा के फलस्वरूप मिलती है.
कुछ लोग जहाँ जाते हैं वहां खुशियाँ लाते हैं, कुछ लोग जब जाते हैं तब खुशियाँ लाते हैं.
प्रसन्नता कोई पहले से निर्मित वास्तु नहीं है. वो आपके कर्मो से आती है.
जब महत्त्वाकांक्षाएं ख़तम होती हैं, तब ख़ुशी शुरू होती है.
कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिये जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हों. ऐसी मित्रता कभी आपको ख़ुशी नहीं देगी.
Next time when you think about a wonderful & beautiful thing in life don't forget to include YOURSELF in it.