मैं तोह पहले से ही बिगड़ा हुआ हु तुम जैसे मेरा क्या बिगाड़ लोगे
जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ
शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला एक बार में सौ को पछड़ना नहीं भूला
हम दोनों बराबर जिद्दी रहे हमेशा ना उसने गुस्सा कम किया ना मैंने प्यार
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.
मैं तोह पहले से ही बिगड़ा हुआ हु तुम जैसे मेरा क्या बिगाड़ लोगे
जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ
शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला एक बार में सौ को पछड़ना नहीं भूला
हम दोनों बराबर जिद्दी रहे हमेशा ना उसने गुस्सा कम किया ना मैंने प्यार
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.